Chamatkari Dadhi Vamana Mantra | दधि वामन मंत्र

Chamatkari Dadhi Vamana Mantra - दधि वामन मंत्र

📅 Sep 12th, 2021

By Vishesh Narayan

Summary Chamatkari Dadhi Vamana Mantra is a tool to please the Lord Vishnu in his Vaman form. If a Mantrik does one thousand aahuti with Kheer, then he gets Lakshmi. If the Mantrik remembers the Trivikram form of Vishnu with concentration, then he gets freedom from bondage quickly.


ऋग्वेद में, भगवान विष्णु ने तीन कदम उठाए, जिसके साथ उन्होंने तीनों लोकों को नापा: पृथ्वी, स्वर्ग और उनके बीच का स्थान। पौराणिक कथाओं में भगवान बौना वामन ने अपना रूप तब दिखाया जब राक्षस राजा बलि ने पूरे ब्रह्मांड पर शासन किया और देवताओं ने अपनी शक्ति खो दी थी।

एक दिन वामन ने बाली के दरबार का दौरा किया और उससे उतनी भूमि की याचना की, जितना वह तीन पदों में ले सकता था।

राजा ने हँसी से अनुरोध स्वीकार किया। एक विशाल रूप में अवतरित होते हुए, वामन ने एक कदम पूरी पृथ्वी को ढँक लिया, और दूसरे चरण के साथ पृथ्वी और स्वर्ग के बीच का मध्यकाल।

चूँकि जाने के लिए कहीं नहीं बचा था, राक्षस राजा ने अपना सिर नीचा किया और वादा किया कि तीसरे चरण के लिए वामन उस पर अपना पैर रखेंगे।

वामन प्रसन्न हुए, और अपने पैर के दबाव से बाली को नीचे की ओर भेज दिया ताकि वे पाताल पर शासन कर सकें। इस रूप में विष्णु की पहचान अक्सर त्रिविक्रम के रूप में की जाती है |

शारदातिलक के अनुसार दधिवामनाख्य चमत्कारी अष्टादशाक्षर मंत्र के चरण में मंत्र के तीन लाख जप का विधान है। इसके दशांश का होम, तर्पण, मार्जन और बहस भोजन कराया जाता है।

इससे मंत्र सिद्धि को प्राप्त होता है और मात्रिक सिद्ध मंत्र से प्रयोगों को सिद्ध कत है। ऐसी मान्यता है कि मंत्र का तीन लाख जप करने के बाद उसके दशांश का घीयुक्त खीर अथवा वह वह उन से यथाविधि होम करना चाहिए।

सुरपूजित इस होम को देवता का विधान माना गया है।

यदि मान्त्रिक बीव खीर से एक हजार होम करे तो उसे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। अन्न से होम करने पर अन्न प्राप्त होता है।

सौंफ के बीजों से होम करके भय का नाश किया जा सकता है।

शुद्ध दही व भात के होम से दुर्गति मे मुक्ति मिल जाती है।

यदि मान्त्रिक विष्णु के त्रिविक्रम रूप का एकाग्रता से स्मरण करे तो उसे बंधनों से शीघ्र मुक्ति मिल जाती है, इसमें संशय नहीं।

यदि मान्त्रिक देवेश का चित्र बनाकर सुगंधित पुष्पों से उसकी पूजा करे तो उसे महती श्री संपन्नता प्राप्त होती है।

भूमि का व्यवसाय करने वाले भक्तों के लिए यह मन्त्र कामधेनु के समान है |

Chamatkari Dadhi Vamana Mantra

ॐ नमो विष्णवे सुरपतये महाबलाय स्वाहा
Om Namo Vishnave Surpatye Mahablay Swaha

विनियोग

अस्य मंत्रस्य इन्दुषिविराट्छन्दो दधिवामनो देवता सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः।

ऋष्यादिन्यास

ॐ इन्दु ऋषये नमः शिरसि॥

विराट्छन्दसे नमः मुखे॥

दधिवामनदेवतायै नमः हृदि॥

विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे॥

करन्यास

ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः॥

नमः तर्जनीभ्यां नमः ॥

विष्णवे मध्यमाभ्यां नमः ॥

सुर पतये अनामिकाभ्यां नमः॥

महाबलाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॥

स्वाहा करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

हृदयादिषडंगन्यास

ॐ हृदयाय नमः॥

नमः शिरसे स्वाहा॥

विष्णवे शिखायै वषट्।

सुरपतये कवचाय हुं॥

महाबलाय नेत्रत्रयाय वौषट्।

स्वाहा अस्त्राय फट्॥

ध्यान

ॐ मुक्तागौरं नवमणिलसद्धषणं चन्द्रसंस्थं भृङ्गाकारैरलकनिकरैः शोभिवक्त्रारविन्दम।

हस्ताब्जाभ्यां कनककलशं शुद्धतोयाभिपूर्णं दध्यन्नाढ्यं कनकचषकं धारयन्तं भजामः ॥


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