Dakshinamurthy Mantra for Super Memory | वाणी की सिद्धि

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Summary ↬ Dakshinamurthy Mantra for Super Memory is a mantra sadhana to enhance the memory and brain power. Dakshinamurthy is the another name of Lord Shiva. Dakshinamurthy means spiritual wisdom. Dakshinamurthy is a prayer to Lord as a Teacher.

👉 Vishesh Narayan

📅 Sep 12th, 2021

Dakshinamurthy Mantra for Super Memory is a mantra Sadhana to enhance memory and brainpower. Dakshinamurthy is another name of Lord Shiva.

Dakshinamurthy means spiritual wisdom. Dakshinamurthy is a prayer to the Lord as a teacher.

वाणी की सिद्धि के लिए दक्षिणामूर्ति मंत्र

शारदातिलक के अनुसार बाईस अक्षरों का दक्षिणामूर्ति मंत्र वाणी की सिद्धि के लिए प्रयोग किया जा सकता है | दक्षिणामूर्ति भगवान् सदाशिव का ही एक स्वरुप है जी की अद्वितीय और मेधायुक्त है |

इस 22 अक्षरी मंत्र का प्रयोग करने वाला मन्त्रिक विद्वान् बनता है और वेदशास्त्र आदि सुनाता है, इसमें संदेह नहीं। कवि बनने के लिए और दार्शनिक बनने के लिए भी इस मंत्र का सेवन किया जाता है |

निरन्तर इसका उपयोग करने से मन्त्रिक को लक्ष्मी व आरोग्य की प्रप्ति होती है।

दक्षिणामूर्ति मंत्र विनियोग

अस्य दक्षिणामूर्तिमंत्रस्य चतुर्मुख ऋषिः। गायत्री छन्दः। वेदव्याख्या-नतत्परदक्षिणामूर्तिदेंवता। सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः।

दक्षिणामूर्ति मंत्र ऋष्यादिन्यास

ॐ चतुर्मुखर्षये नमः शिरसि ॥

गायत्री छन्दसे नमः मुखे ॥

दक्षिणामूर्तये देवतायै नमः हदि।॥

विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे॥

दक्षिणामूर्ति मंत्र करन्यास

ॐ आं ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः ।

ॐ ई ॐ तर्जनीभ्यां नमः ॥

ॐ ॐं ॐ मध्यमाभ्यां नमः: ॥

ॐ ऐं ॐ अनामिकाभ्यां नमः॥

ॐ औं ॐ कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॥

ॐ अः ॐ करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

दक्षिणामूर्ति मंत्र हृदयादिषडंगन्यास

ॐ हृदयाय ई ॐ शिरसे स्वाहा॥

ॐ ॐं ॐ शिखायै वषट्।।

ॐ कवचाय हुं॥

ॐ औं ॐ नेत्रत्रयाय वौषट्।॥

ॐ अः ॐ अस्त्राय फट्॥

Dakshinamurthy Mantra For Super Memory

ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रयच्छ स्वाहा।
Om Namo Bhagavate Dakshinamurthaye Mahyam Medhaam Prayachch Swaha

आवरण पूजा करने के उपरांत धूपादि से आरती तक पूजा करनी चाहिए, फिर जप करना चाहिए। इसके पुरश्चरण में मंत्र के एक लाख जप का विधान है।

ऐसी मान्यता है कि मांत्रिक को ब्रह्मचारी और व्रती रहकर एक लाख जप करना चाहिए। इसके उपरांत संस्कारी अग्नि में जप के दशांश का होम घी सने कमलों से करना चाहिए।

इससे मंत्र सिद्धि को प्राप्त होता है और उत्तम मांत्रिक वाग्देवी की कृपा से वाचस्पति बनता है। मांत्रिक इस मंत्र के जप से अभिमंत्रित जल से शीश अभिसिंचित करता है तो उसे लक्ष्मी व आरोग्य की प्रप्ति होती है।

सूर्योदय से पहले जल में गले तक खड़े होकर प्रत्येक दिन मंत्र का एक हजार जप करने वाले का नाम कवियों में सबसे आगे होता है।

संपन्नता की कामना करने वाला गौरी के पार्श्व में बैठे हुए शिव का चिंतन करते हुए मंत्र का दस हजार जप करता है तो उसे अकूत धन की प्राप्ति होती है।

यदि मांत्रिक जितेंद्रिय होकर भिक्षाटन से प्राप्त चावल गोमूत्र में पकाकर खाता है और मंत्र का बीस हजार जप करता है तो वह बिना सुने वेदशास्त्र आदि सुनाता है, इसमें संदेह नहीं।

ये दोनों मंत्र सिद्धों, गंधवों, मुनियों व योगीद्रों द्वारा सेवित ज्ञान और वाणी की सिद्धि के लिए हैं। यहां इनका उल्लेख योग्य मात्रिकों के लाभ के लिए किया गया है।

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