Anjaneya Ashtottara Shatanamavali | 108 Names Hanuman

Anjaneya Ashtottara Shatanamavali - 108 Names Hanuman

📅 Sep 13th, 2021

By Vishesh Narayan

Summary Anjaneya Ashtottara Shatanamavali is a stotra depicting the hundreds of names of Lord Hanuman or Anjaneya. Hanuman Ashtothar Shat Naamavli is a very important and practical stotra to eliminate black magic and malevolent forces.


Anjaneya Ashtottara Shatanamavali is a stotra representing the hundreds of names of Lord Hanuman or Anjaneya. Anjaneya is another name of Lord Hanuman.

Lord Hanuman is the incarnation of Lord Shiva. Lord Hanuman is swift as mind, has a speed equal to the wind God, has complete control on his senses, the son of wind god, the one who is the chief of vanara army, is the messenger of Rama, is the repository of incomparable strength. is the destroyer of forces of demons and liberates from dangers.

Hanuman Ashtothar Shat Naamavli is a very powerful and effective stotra to remove black magic and evil forces.

Effective Vidhi To Chant The Anjaneya Ashtottara Shatanamavali

  • The sadhna should be started from Tuesday or any auspicious day.
  • Take 108 red flowers with you and some water.
  • After chanting each name of Lord Hanuman, offer one flower.
  • After chanting 108 names, collect those flowers in a pot filled with water.
  • You can sprinkle this water in the affected premises or you can give this water to the person.
  • Throw the flowers in a river nearby the next day.
  • Repeat the sadhna 4-5 times only on Tuesdays for better results.
  • It is better to do this sadhna in a nearby Lord Hanuman Temple.

Anjaneya Ashtottara Shatanamavali Text

श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशत नामावलिः

ॐ मनोजवं मारुततुल्य वेगंजितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् .
वातात्मजं वानरयूध मुख्यं श्री रामदूतं शिरसा नमामि

ॐ आञ्जनेयाय नमः

ॐ महावीराय नमः

ॐ हनूमते नमः

ॐ मारुतात्मजाय नमः

ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः

ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः

ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः

ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः

ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः

ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः

ॐ परविद्या परिहाराय नमः

ॐ पर शौर्य विनाशकाय नमः

ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः

ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः

ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः

ॐ भीमसेन सहायकृथे नमः

ॐ सर्वदुखः हराय नमः

ॐ सर्वलोकचारिणे नमः

ॐ मनोजवाय नमः

ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः

ॐ सर्व मन्त्र स्वरूपाय नमः

ॐ सर्व तन्त्र स्वरूपिणे नमः

ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः

ॐ कपीश्वराय नमः

ॐ महाकायाय नमः

ॐ सर्वरोगहराय नमः

ॐ प्रभवे नमः

ॐ बल सिद्धिकराय नमः

ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः

ॐ कपिसेनानायकाय नमः

ॐ भविष्यथ्चतुराननाय नमः

ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे नमः

ॐ रत्नकुन्डलाय नमः

ॐ दीप्तिमते नमः

ॐ चन्चलद्वालसन्नद्धाय नमः

ॐ लम्बमानशिखोज्वलाय नमः

ॐ गन्धर्व विद्याय नमः

ॐ तत्वञाय नमः

ॐ महाबल पराक्रमाय नमः

ॐ काराग्रह विमोक्त्रे नमः

ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः

ॐ सागरोत्तारकाय नमः

ॐ प्राज्ञाय नमः

ॐ रामदूताय नमः

ॐ प्रतापवते नमः

ॐ वानराय नमः

ॐ केसरीसुताय नमः

ॐ सीताशोक निवारकाय नमः

ॐ अन्जनागर्भ संभूताय नमः

ॐ बालार्कसद्रशाननाय नमः

ॐ विभीषण प्रियकराय नमः

ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय नमः

ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः

ॐ वज्र कायाय नमः

ॐ महाद्युथये नमः

ॐ चिरंजीविने नमः

ॐ राम भक्ताय नमः

ॐ दैत्य कार्य विघातकाय नमः

ॐ अक्षहन्त्रे नमः

ॐ काञ्चनाभाय नमः

ॐ पञ्चवक्त्राय नमः

ॐ महा तपसे नमः

ॐ लन्किनी भञ्जनाय नमः

ॐ श्रीमते नमः

ॐ सिंहिका प्राण भन्जनाय नमः

ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः

ॐ लंकापुर विदायकाय नमः

ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः

ॐ धीराय नमः

ॐ शूराय नमः

ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः

ॐ सुवार्चलार्चिताय नमः

ॐ तेजसे नमः.

ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः .

ॐ कामरूपिणे नमः

ॐ पिन्गाळाक्षाय नमः

ॐ वार्धि मैनाक पूजिताय नमः

ॐ कबळीकृत मार्तान्ड मन्डलाय नमः

ॐ विजितेन्द्रियाय नमः

ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः

ॐ महिरावण मर्धनाय नमः

ॐ स्फटिकाभाय नमः

ॐ वागधीशाय नमः

ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः

ॐ चतुर्बाहवे नमः

ॐ दीनबन्धुराय नमः

ॐ मायात्मने नमः

ॐ भक्तवत्सलाय नमः.

ॐ संजीवननगायार्था नमः

ॐ सुचये नमः

ॐ वाग्मिने नमः

ॐ दृढव्रताय नमः

ॐ कालनेमि प्रमथनाय नमः

ॐ हरिमर्कट मर्कटाय नमः

ॐ दान्ताय नमः

ॐ शान्ताय नमः

ॐ प्रसन्नात्मने नमः

ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे नमः

ॐ योगिने नमः

ॐ रामकथा लोलाय नमः

ॐ सीतान्वेशण पठिताय नमः

ॐ वज्रद्रनुष्टाय नमः

ॐ वज्रनखाय नमः

ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय नमः

ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारकाय नमः

ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः

ॐ शरपंजरभेधकाय नमः

ॐ दशबाहवे नमः

ॐ लोकपूज्याय नमः

ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः

ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय नमः

इति श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशत नामावलि संपूर्णम्

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